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    Ae khuda.. teri nazare Lyrics | आसमान बयान करते | Hindi Christian Song Lyrics

    Asaman bayan karte
    Khuda ka jalaal
    aur faza bataatee
    hai usaka kamaal
    haan subah aur shaam bhee
    aur din bhee aur raat
    dikhalaate alaqaadir
    Khuda kee sifaat

    na unakee zubaan hai
    na unakee aavaaz
    par taubhee bajaate
    sitaish ka saaz
    ki khilaqat se khaalik ka
    hota bayaan
    vah qaadir-i-mutalak
    haqeem aaleeshaan

    zameen aur aasamaan par
    hai rabb ka qalaam
    ki sooraj aur chaand
    aur sitaare tamaam
    pahaad o samundar
    maidaan o daraya
    sab kahate hain khaaliq
    hai qaadir Khuda

    dekh dulhe kee maanind
    hai sooraj taiyaar
    nikalata hai poorab se
    ho raunakadaar
    aur pachchhim ko karata hai
    garadish tamaam
    aur chhipa hai us se
    na koee makaam

    aasamaan bayaan karate
    Khuda ka jalaal
    aur faza bataatee
    hai usaka kamaal
    haan subah aur shaam bhee
    aur din bhee aur raat
    dikhalaate alaqaadir
    Khuda kee sifaat

    आसमान बयान करते
    ख़ुदा का जलाल
    और फ़ज़ा बताती
    है उसका कमाल
    हां सुबह और शाम भी
    और दिन भी और रात
    दिखलाते अलक़ादिर
    ख़ुदा की सिफ़ात

    न उनकी ज़ुबान है
    न उनकी आवाज़
    पर तौभी बजाते
    सिताइश का साज़
    कि ख़िलक़त से ख़ालिक का
    होता बयान
    वह क़ादिर-इ-मुतलक
    हक़ीम आलीशान

    ज़मीन और आसमान पर
    है रब्ब का क़लाम
    कि सूरज और चाँद
    और सितारे तमाम
    पहाड़ ओ समुन्दर
    मैदान ओ दरया
    सब कहते हैं ख़ालिक़
    है क़ादिर ख़ुदा

    देख दुल्हे की मानिन्द
    है सूरज तैयार
    निकलता है पूरब से
    हो रौनकदार
    और पच्छिम को करता है
    ग़रदिश तमाम
    और छिपा है उस से
    न कोई मकाम

    आसमान बयान करते
    ख़ुदा का जलाल
    और फ़ज़ा बताती
    है उसका कमाल
    हां सुबह और शाम भी
    और दिन भी और रात
    दिखलाते अलक़ादिर
    ख़ुदा की सिफ़ात

    ख़ुदा का जलाल
    और फ़ज़ा बताती
    है उसका कमाल
    हां सुबह और शाम भी
    और दिन भी और रात
    दिखलाते अलक़ादिर
    ख़ुदा की सिफ़ात

    न उनकी ज़ुबान है
    न उनकी आवाज़
    पर तौभी बजाते
    सिताइश का साज़
    कि ख़िलक़त से ख़ालिक का
    होता बयान
    वह क़ादिर-इ-मुतलक
    हक़ीम आलीशान

    ज़मीन और आसमान पर
    है रब्ब का क़लाम
    कि सूरज और चाँद
    और सितारे तमाम
    पहाड़ ओ समुन्दर
    मैदान ओ दरया
    सब कहते हैं ख़ालिक़
    है क़ादिर ख़ुदा

    देख दुल्हे की मानिन्द
    है सूरज तैयार
    निकलता है पूरब से
    हो रौनकदार
    और पच्छिम को करता है
    ग़रदिश तमाम
    और छिपा है उस से
    न कोई मकाम

    आसमान बयान करते
    ख़ुदा का जलाल
    और फ़ज़ा बताती
    है उसका कमाल
    हां सुबह और शाम भी
    और दिन भी और रात
    दिखलाते अलक़ादिर
    ख़ुदा की सिफ़ात

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